10 Amazing Facts of Lord Mahadev

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10 Amazing Facts About Mahadev ,Amazing Facts About Mahadev

10 Amazing Facts About Mahadev

Mahadev is also called Devo Ke Dev Mahadev.He is the Principal Deities of Hinduism.Lord Shiva have Many Avatars and it is mentioned in Shiva Purana.Mahashivratri is Considered as the Biggest Festival of Lord Shiva.He is Protector,Destroyer and Transformer.He is present in Every Individual and Once he opened his Third eyes,Everything Becomes Ash.

In This Post i will talk about 10 Things Which You dont Know About Lord Shiva.Before that Lets Chant Om Namah Shivaay 3 Times..ok You did it!Now Lets Start….

He Cursed Brahma!

Once upon a time there was a war between tridev that who is the greatest god of the universe.Lord brahma brought ketaki flower & said to lord shiva that he found the end of jyotirling.But lord shiva caught lie of brahma & punished him that no one would worship him.This is the curse by lord shiva to Brahma.That is the reason there is only one temple of lord brahma in India.

His Demon Son- Jalandhar

Jalandhar was the Demon Son of Lord Shiva.Actually When Shiva Throws his Anger from Third eyes in ocean,A loud crying Sound of a Child was heard by Lord Brahma.He named this Child as Jalandhar.Jalandhar Conquered all the three World but was Stopped by Mahadev because he was Spreading Chaos in the Universe.

He is Called Natraj

Natraj Means Lord of the Dance.The Story is Once There was a demon Named Apasmar who Was Haters of Lord Shiva.Shiva Did Tandav on this Chest and Remain in the Same Position timelessly.This Gave Him an Another Name Called Natraj Means Lord of the Dance

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Sati is His First love

We all know Sati as the Daughter of Prajapati Daksha.Daksha was actually the son of Lord Brahma.He never Liked Lord Shiva.Sati fell in Love With Shiva but this Love Story Ends With Sati when She burnt her Body in Fire.This makes Mahadev Full of Rage and He cut Daksha Head but Finally Forgave Him.Thats Why Mahadev is also Called Bholenath

Bhilni Wanted to Marry Him!

10 Amazing Facts About Mahadev

Once Goddess Parvati Decided to Test Mahadev.She Took the Avatar of Bhilni and Invited Mahadev for Food.Mahadev agreed and Favor his all Conditions.Mahadev Is lord of the Lord,He already knew it was the Maya of Goddess Parvati

He Broke Arrogance Of Ganga!


When Bagirath Trying to Bring Ganga on the Earth,It was seemed to be impossible task because stream of Ganga was so powerful even the Whole Universe Could Sink into it.Then Lord Shiva Opened his Hair and Settled Ganga in his Jata.Thats the reason,he is also called Gangadhar.

The Sound OM

Om is Considered as Sacred Chant in the Universe.Om is actually the Sound of the Universe and it is Heard only When you meditate in deeper State.Did u know On Sound Actually is Discovered by Lord Shiva.His Chant OM NAMAH SHIVAAY is very Sacred Chant in the Hindu Mythology.

Lord of the Snakes

Lord Shiva is Known as the Lord of the Snakes.The Snake he Actually wear around his Neck is Vasuki,who is King of the Serpants.There are 3 Coil of Snakes in the Shiva Neck Which Signify Past,Present & Future

He is Called Mahakal


Mahakal refers to those Who is Beyond the Time.In Simple Words,it means Those Who Conquered Time.Lord shiva is also called Mahakal because He Is the Winner of Time.Past,Present and future Everything Comes from his Will.

Ravan is his Greatest Devotee!


Ravan is Known as the Greatest Devotee of Lord shiva.He created Shiv Tandam Strotam and Is quite Popular in Hindu Mythology.Despite He Stole Wife of Rama but His Devotee towards Lord Shiva can’t be Ignored.Lord Shiva Forgive Everyone ,You just have to Please Him.He is easily Pleased God .That’s Why he is called Ashutosh.

He is Devo ke Dev Mahadev

महादेव को देवो के देव भी कहा जाता है।जब भी कोई संकट आता है तो सभी देवता चाहे वो असुर हो या सुर महादेव का स्मरण जरूर करते है।गले में सापों की माला लपेटे और मस्तक पर चंद्रमा लिए महादेव सभी का कष्ट निवारण करते है।

वो कभी भी अपने भक्तों में भेदभाव नही करते है।यु कहे तो हर कण कण में महादेव बस्ते है।वो सबका कल्याण करते है चाहे वो सुर हो या राक्षस,महादेव की कृपा सदैब सब पर बनी रहती है।

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महादेव को पशुपति भी कहा जाता है।यूं कहें तो भगवान शिव के तो अनेक पुत्र है।कार्तिकेय, गणेश और अशोक सुंदरी भगवान शिव के ही पुत्र और पुत्री है।पर आप लोगो में से बहुत कम ही लोग जानते होंगे की जलंधर भी भगवान शिव का ही पुत्र था।जलंधर ने तीनों लोकों को अपने अधीन कर लिया था और स्वर्ग का राजा बन बैठा।जलंधर को भगवान शिव का Demon Son भी कहा जाता है मतलब राक्षस पुत्र।

ॐ हिन्दू सनातन धर्म का बहुत ही पवित्र शब्द माना गया है।ॐ नमः शिवाय एक ऐसा हिन्दू मंत्र है जिसका उच्चारण करने से सभी कष्टो का निवारण होता है।ऐसा कहा भी गया है कि जिसका न कोई उपाय उसका बस एक ही उपाय:-ॐ नमः शिवाय।

प्रजापति दक्ष था महादेव का घोर विरोधी

प्रजापति  दक्ष ब्रह्न का पुत्र था।जब इस सृष्टि की उत्पत्ति हुई थी जो की ब्रह्मा ने की थी।एक बार की बात है ब्रह्मा और विष्णु में शर्त लगी की उन दोनों में सबसे श्रेष्ठ कौन है।तभी अचानक एक भयानक लिंग उत्पन्न हुआ जिसका न कोई छोर था।वो तो इतना विकट था कि उसका छोर पता लगाना नामुमकिन ही था।

उस लिंग से आवाज़ आयी की अगर आप दोनों में से जो सबसे पहले मेरा आखिरी छोड़ पता लगा लेगा वही सर्वश्रेष्ठ होगा।छोर का पता लगाने के लिए विष्णु ने सूगर का अवतार लिया और ब्रह्मा भी उस छोर को पता लगाने निकल पड़े।

पर किसी को उस लिंग का आखिरी छोर नही मिल पाया।उस लिंग का न तो कोई आदि था न कोई अंत।वो तो अनंत था।
पर ब्रह्मा ने झूठ बोला की उन्होंने उस लिंग का आखिरी छोर पा लिया है।तब उस लिंग में महादेव उत्पन्न हुए।उन्हें ब्रह्मा की बात सुनकर बहुत क्रोध आया और उन्होंने ब्रह्मा का 5वा सर काट दिया वही महादेव विष्णु की ईमानदारी पर बहुत प्रसन्न हुए।फिर क्या था तब से ही प्रजापति दक्ष महादेव का घोर विरोधी हो गया।


प्रजापति दक्ष ने महादेव से बदला लेने के लिए अनेक सरयंत्र रचा पर महादेव के आगे उसका हर वार विफल हो गया।वही दक्ष की सबसे प्रिय पुत्री महादेव से प्यार करने लगी और वो महादेव से शादी करना चाहती थी।पर दक्ष तो महादेव का घोर विरोधी था उसने महादेव को नीचा दिखाने के लिए एक महान यज्ञ का आयोजन किया।इस यज्ञ में उसने सभी देवी,देवता ,यक्ष,गन्धर्व को आमंत्रित किया पर महादेव को नही।

 

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ये सुन कर माता सती को बहुत क्रोध आया पर वो महादेव से उस यज्ञ में जाने के लिए ज़िद करने लगी।महादेव ने माता सती को समझाया कि भले की दक्ष आपके पिता हो पर बिना निमंत्रण के उस यज्ञ में जाना ठीक नही होगा।इस से आपका केवल अहित ही होगा।फिर भी माता सती नही मानी।

अंत में महादेव ने अपने प्रिय वाहन नंदी को माता सती के साथ जाने को कहा जब माता सती यज्ञ में पहुची तो दक्ष ने महादेव को बहुत बुरा भला कहा।इस से माता सती बहुत दुखी हुई और उन्होंने उसी यज्ञ के अग्निकुंड में अपने प्राणों की आहुति दे दी।


इस सब से चारो ओर हाहाकार मच गया।जब महादेव को उसका पता चला तो वो क्रोध के मारे तांडव करने लगे।तांडव वो नृत्य है जो प्रलय के समय महादेव करते है।महादेव ने अपनी जटा को ज़मीन पे पटक दिया जिससे भयानक वीरभद्र प्रकट हुआ।

वीरभद्र ने दक्ष का सर धर से अलग कर दिया पर महादेव तो दयालु है ।उन्होंने दक्ष को बकरी का सर लगा दिया।दक्ष ने महादेव से क्षमा मांगी और उनसे कहा कि आज के बाद कोई भी यज्ञ महादेव के आवाहन के बिना पूरा नही होगा।

आखिर क्यों करना पड़ा महादेव को अर्जुन से युद्ध

अर्जुन 5 पांडवो में से एक था।अर्जुन के बड़े भाई का नाम युधुस्थिर था।अर्जुन बहुत ही पराक्रमी योध्या था।महाभारत के युद्ध में उसने कौरवो सेना को धूल चटा दी थी।


तो आये जानते है की आखिर क्यों करना पड़ा महादेव को अर्जुन से युद्ध।
एक बार की बात है अर्जुन जंगल में भगवान शिव की घोर तपस्या में लीन थे।वो भगवान शिव को प्रसन्न करने के उद्देश्य से ये तपस्या कर रहे थे।तभी वहा एक मूक नामक दैत्य सूकर का रूप धारण करके वहाँ आ गया।अर्जुन उस सूकर का वध करने के लिए आये,तभी भगवन शिव अर्जुन की परीक्षा हेतु भगवान शिव भी धनुष -बाण धारण कर वहाँ आ पहुचे।

10 Amazing Facts of Lord Mahadev
10 Amazing Facts of Lord Mahadev

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दोनों में साथ में बाण चलाया और शिवजी का बाण सूकर को वेधता हुआ मुख के रास्ते निकलकर भूमि में विलीन हो गया।अर्जुन का बाण सूकर को भेदकर बगल में ही गिर पड़ा।जब शिवजी का अनुचर बाण उठाने आया तो अर्जुन का उस से विवाद हो गया कि किसके बाण से सूकर का वध हुआ है।

 

इस बात पर अर्जुन किरात के साथ युद्ध करने को उधत हो गए।गणों सहित महादेव के साथ अर्जुन का घोर युद्ध हुआ ।शिवजी अर्जुन की युद्धकौशल से बहुत प्रसन हुए और उसे अपने असल स्वरुप के दर्शन दिए।अर्जुन को अपनी भूल का एहसास हुआ और उन्होंने प्रभु शिव की स्तुति की।अंततः वर स्वरुप शिवजी ने अर्जुन को अपना पाशुपत अस्त्र प्रदान किया।

कौन था Andhak।क्यों उसने भगवान Shiv से Parvati को ही वरदान में मांग लिया था।

क्या आपको पता है कि Andhak ने भगवान Shiv से माता पार्वती को ही वरदान में मांग लिया था।

एक बार की बात है भगवान Shiv कैलाश पर्वत पर घोर तपस्या में लीन थे तभी माता पार्वती ने शिव के दोनों आँखों को अपनी हाथों से ढक दिया जिस से समस्त ब्रह्मांड अंधकार में डूब गई थी।भगवान Shiv ने अपनी तीसरी आँख को खोल दिया जिससे अग्नि प्रकाशित हुई।ये अग्नि उनके पसीने(Sweat) से मिल गयी,जिस से अंधक का जनम हुआ।अंधक जन्म से ही अँधा था।

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दूसरी ओर असुर सम्राट Hiranyaksh पुत्र की प्राप्ति के लिए भगवान शिव की घोर तपस्या करने लगा।भगवान Shiv ने प्रकट होकर Hiranyaksh को Andhak भेंट दिया और उन्होंने उसे चेतावनी दी की अगर उसके पुत्र ने कोई भी पाप किया तो वो उसे खुद दंड देंगे और उसके प्राण हर लेंगे।Hiranyaksh ने भगवान शिव की बात मान ली।


यु तो Andhak जन्म से ही अँधा था परंतु वो भगवान Shiv की तीसरी आँख से जन्मा था इसलिए वो काफी पराक्रमी और बलवान था।चूंकि अंधक का जन्म उस समय हुआ था जब समस्त ब्रह्मांड अंधकार में लिप्त था,इसका प्रभाव ये हुआ की अंधक में असुरो वाले गुण आ गए और दिनों दिन वो काफी निर्दयी बनता गया।


एक बार की बात है Andhak Brahma की घोर तपस्या कर रहा था।Brahma ने अंधक को वरदान दिया की उसके रक्त की जितनी भी बूंदे ज़मीन पर गिरेगी उस से एक और नए अंधकासुर असुर का जनम होगा।

 

एक और असुर था जिसे ये बरदान मिला हुआ था,जिसका जिक्र दुर्गा पाठ ने मिलता है,उस असुर का नाम रक्तबीज था।बरदान पाकर Andhak बहुत प्रसन्न हुआ और वो तीनो लोको पर आधिपत्य ज़माने के लिए तयारी करने लगा।

एक दिन अंधक ने कैलाश पर माता पार्वती को देखा और वो उनकी सुंदरता का कायल हो गया।वो माता पार्वती से शादी करना चाहता था।ये सब सुनकर माता पार्वती को बहुत क्रोध हुआ और उन्होंने ये बात भगवन शिव को बताई।ये बात सुनकर महादेव को बहुत क्रोध हुआ और उन्होंने Andhak से कहा कि पारवती उसकी माता के समान है तो भला वो अपनी ही माँ से कैसे विवाह कर सकता है।

ये सब के बाबजूद अंधक नही माना और Andhak और भगवान Shiv ने प्रलयकारी युद्ध हुआ।जब भी रक्त की कोई बून्द ज़मीन पर गिरती,उस से एक और अंधकासुर का जन्म हो जाता ।

तब भगवान shiv ने Kaali का आह्वान किया।माता काली ने अंधक का सारा रक्त ज़मीन पर पड़ने से पहले ही उसे चट कर जाती,जैसे की उन्होंने रक्तबीज नामक असुर का वध किया था,ठीक उसी प्रकार,उन्होंने Andhak का वध कर दिया।आख़िरकार भगवान Shiv ने Andhak को अपनी तीसरी आँख से भस्म कर दिया।


पर महादेव तो भोलेनाथ है,अंधक ने भगवान शिव से माफ़ी मांगी और भगवान शिव ने उन्हें अपनी गण में शामिल कर लिया।अंधक अब Bringi बन चूका था।Bringi को Shiv का ही गण माना जाता है।

ऐसा था Shiv का Demon Son :- जलंधर!

एक बार की बात है जब महादेव कैलाश पर घोर तपस्या में लीन थे तब इंद्रदेव महादेव से मिलने कैलाश पर आये।महादेव ने इंद्र की परीक्षा लेने हेतु एक अघोरी का अवतार लिया।वो अघोर अवतार लिए ठीक बीचो बीच बैठ गए।इंद्र ने अघोरी को कहा कि वो उसका रास्ता छोर दे और उसे कैलाश पर जाने दे।

 

पर अघोरी अवतार में विराजमान महादेव ने इंद्र को मना कर दिया।ये सब देखकर इंद्र को बहुत क्रोध हुआ और उसने उस अघोरी को चेतावनी दी अगर वो उसे नही जाने देगा तो वो उसे मृत्युदंड देगा।तब महादेव ने अपना असली रूप इंद्र को दिखाया।ये सब देख इंद्र बहुत लज़्ज़ित हुआ।

 

महादेव ने अपनी तीसरी आँख खोल दी।महादेव की तीसरी आँख ने अग्नि है जो किसी को भी भस्म कर सकती है।बहुत देवी देवता के मानाने पर महादेव ने वो अग्नि का तेज जो की महादेव की तीसरी आँख से निकली थी,उसे समुद्र ने फेंक दिया।

तभी उस तेज से एक रोते हुए बच्चे का जनम हुआ।ऐसा कहा जाता है कि वो बालक के रोने की ध्वनि इतनी तेज थी की खुद ब्रह्मा भी डर गए।ब्रह्मा ने उस बालक को अपनी गोद में उठाया और उसका नामकरण भी किया।ब्रह्मा ने उसका नाम जलंधर रखा।ऐसा इसलिए क्योंकि जलंधर का मतलब है जो जल के अंदर हो।


जलंधर की परवरिश उसकी माँ ने किया।पर इंद्रदेव ने जलंधर की माँ की हत्या कर दी।तब से जलंधर इंद्र का घोर सत्रु बन गया।जलंधर ने इंद्र से ऐरावत हाथी भी छीन ली और स्वर्गलोक पर अपना आधिपत्य जमा लिया।

जलंधर के गुरु का नाम शुक्राचार्य था जो असुर के प्रमुख गुरु माने जाते है।जलंधर ने कालनेगी की पुत्री वृंदा से विवाह किया था।कालनेगी एक असुर था।वृंदा जलंधर से वहुत प्रेम करती थी,इसी के चलते जलंधर का कोई कुछ नही बिगाड़ सकता था।ऐसा इसलिए क्योंकि वृंदा एक पति वर्ता औरत थी।माता लक्ष्मी ने जलंधर को अपना भाई बना लिया।


क्या आप जानते है कि जलंधर महादेव का महासत्रु था।एक बार की बात है जलंधर को माता पार्वती से प्रेम हो गया।वो माता पार्वती से शादी करना चाहता था।ये सब सुनकर माता पार्वती को वहुत क्रोध हुआ।जलंधर ने महादेव से कहा कि आप तो एक योगी है फिर भी आपकी पत्नी है।

ये सुनकर महादेव को वहुत क्रोध हुआ और महादेव और जलंधर के बीच एक प्रलयकारी युद्ध हुआ जिससे समस्त ब्रह्मांड कांप उठी।महादेव ने अपनी त्रिशूल से जलंधर का वध किया।

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आपके घर ने तुलसी का पौधा तो ज़रूर होगा,वास्तव में ये जलंधर की पत्नी वृंदा है।वृंदा के पति व्रत के कारण जलंधर को कोई नही मार सकता था।तब भगवान विष्णु ने जलंधर का वेश ओढ़कर वृंदा का पति व्रत तोड़ दिया।जलंधर अगर शिव का राक्षस पुत्र था तो पराक्रमी भी था।

ॐ का वास्तविक मतलब आपको नही पता होगा।

ॐ  का उल्लेख महादेव के ध्यान से मिलता है।जब इस पृथ्वी पर कुछ था नही केवल Vibrations था।ॐ की ध्वनि सुनना हर किसी के वश की बात नही है।आप बस इसे feel कर सकते हो।

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ॐ के साढ़े 3 भाग है।इन सभी भागों को मिलाकर ॐ का उच्चारण होता है।ॐ का पहला भाग है:-(अ)! अ से यहाँ प्रयाय है उत्पत्ति।आप इसे ब्रह्मा से जोड़कर देख सकते है।दूसरा भाग है:-(ऊ)! उ से यहाँ प्रयाय है भरण पोषण।इसका फील आपको नाभि में होगा।इसको आप विष्णु से जोड़कर देख सकते हो।

ये भरण पोषण करता है।तीसरा भाग है:-(म)!अब आप लोग जान ही गए होंगे की म से महादेव ।महादेव हम सभी के कंठो में निवास करते है ।और एक भाग और होता है जिसका उल्लेख आपको हर जगह नही मिलेगी।जिसका कोई नाद नही होता मतलब शून्य।इन सभी भागों को जोड़कर ॐ की उत्पत्ति हुई है।

आप इसे त्रिदेवो से भी जोड़कर देख सकते है।आपने एक कहावत सुनी हो होगी:-अहम् ब्रह्मास्मि! मतलब मैं ही ब्रह्म हु।इसका प्रयाय ये हुआ की सब कुछ आपके अंदर ही है।ये आपकी चेतना पर निर्भर करता है।इसको जगाना की मानव जीवन का लक्ष्य है।

आखिर क्यों मनाया जाता है शिवरात्रि का त्यौहार हर वर्ष।

शिवरात्रि का त्यौहार Hindu सनातन धर्म का बहुत ही पवित्र त्यौहार माना जाता है।ये हर साल February-March के महीने में मनाया जाता है।ऐसी कहाबत प्रचलित है कि इसी दिन भगवान शिव ने माता पार्वती संग अपना विवाह रचाया था | 

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भगवान शिव को आदि गुरु भी कहा जाता है जिनके करोड़ों शिष्य हुए।शिवरात्रि का मतलब होता है शिव की रात्रि(Night ऑफ़ the Shiva)|ये त्यौहार कृष्ण पक्ष (त्रयोदशी या चतुदर्शी) February- March महीने में मनाया जाता है।

हिन्दू पुराणों के अनुसार ये दिन भगवान शिव का बहुत ही पवित्र दिन माना गया है।एक बार की बात है माता पार्वती ने भगवान शिव से पूछा की :- हे प्रभु!आपको सबसे प्रिय कौन सा दिन है ।तब भगवान महादेव ने कहा कि कृष्ण पक्ष का 14 वाँ दिन उनके लिए सबसे पवित्र दिन है।

ऐसा कहा जाता है कि इस दिन भगवान शिव तांडव नृत्य करते है और इस दिन जो कोई भी सच्चे हृदय से महादेव का ध्यान करते है,उनकी सारी मनोकामनाएं महादेव ज़रूर पूरा करते है।

शिवरात्रि को लेकर एक और कथन हमारे हिन्दू ग्रंथो में मिलता है।एक बार की बात है जब सुर और असुर अमृत की खोज में समुद्र मंथन कर रहे थे तभी उस से भयानक हलालला विष निकला।

विष इतना विकराल था कि इस से सारी सृष्टि का विनाश हो जाता।तब भगवान शिव ने हलालला विष को अपनी कंठो में धारण किया,तब से उनका  नीलकंठ भी कहा जाने लगा।ऐसी मान्यता है कि शिवरात्रि के दिन ही भगवान शिव ने वो हलालला विष का पान किया था।तब से ही शिवरात्रि का त्यौहार प्रचलन में है।

एक और कथा पुराणों में प्रचलित है।एक बार की बात है ब्रह्मा और विष्णु में एक बार किसी चीज़ को लेकर बहस शुरू हो गयी।उन दोनों में शर्त लगी वो उन दोनों में सबसे श्रेष्ठ और शक्तिशाली कौन है।तभी वहा एक अग्नि का स्तंभ प्रजौलीत हुआ।उसका न तो की आदि था न अंत।

उस स्तंभ से आवाज़ आयी की जो सबसे पहले इस स्तंभ का आखिरी छोर पता कर लेगा वही आप दोनों में से सबसे श्रेष्ठ होगा।ब्रह्मा और विष्णु दोनों उस स्तम्भ का आखिरी छोर पता लगाने निकल पड़े।भगवान विष्णु ने वराह का अवतार लिया।उस स्तंभ का छोर पता लगाना इतना भी आसान नही था।

ब्रह्मा ने केतकी का फूल लिया और उस स्तम्भ के पास जाकर बोला की ये फूल उन्हें स्तम्भ के आखरी छोर पर मिला है।पर महादेव को ब्रह्मा की झूठ का पता चल गया।उन्होंने ब्रह्मा को श्राप दिया की वो कभी भी अपने इस झूठ की वजह से पूजे नही जायेंगे।

उन्होंने केतकी को भी श्राप दिया की केतकी के फूल से कभी भी कोई पूजा नही होगी।ये कृष्ण पक्ष का 14 वाँ दिन ही था।जो की शिवरात्रि का ही दिन माना गया है।


शिवरात्रि का त्यौहार मानाने का एक अपना रिवाज़ होता है।इस दिन लोग भांग का भी सेवन करते है।भांग भगवान शिव को अति प्रिय है।इसे शिवलिंग पर अर्पित कर देने से हर पापो का नाश होता है।इस दिन शिवलिंग पर लोग दूध और बेलपत्र चढ़ाते है।

दोस्तों आपको ये पोस्ट कैसा लगा हमें कमेंट बॉक्स में कमेंट करके ज़रूर बताये| पोस्ट पढ़ने के लिए धन्यवाद हर हर #महादेव 

 

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